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गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

मदद एक प्रयास

🕹️ *आवश्यक सन्देश* 🕹️
       17/04/2020

विषय -समाजहित में  सूचना

आदरणीय जैसा कि आप सभी जानते है  हमारे द्वारा संचालित *मैढ़ स्वर्णकार रिश्ते* बहुउद्देश्यीय टीम है और बीते वर्षो से कुछ विषयो पर सदैव सच्चाई  से समाजहित में यथा सम्भव  प्रयासरत करती रही है


    आदरणीय बीते वर्षो में मिले आप सबके आशीर्वाद और स्नेह के कारण अब हमें लगता है समाजहित में हमे और ज्यादा प्रयास और इस टीम का  विस्तार करना होगा

सम्पर्क
Https://wa.me/919034664991

आदरणीय आप जानते है बीते वर्षो पूर्व से हमारे पुश्तेनी व्यवसाय में अन्य जाति बन्धुओ के आने से हमारे बहुत से बन्धुओ को अपना व्यवसाय छोड़कर अन्य काम धंधा करके अपनी जीविका चला रहे थे

उसके बाद एक्साइज के कारण 43 दिनों की हड़ताल में हमारे अनेको बन्धुओ से सुने अनुभव अनुसार  उनकी आर्थिक दशा ऐसी बिगड़ी के उन्हें जेवलरी व्यवसाय छोड़ना पड़ गया

और अब वैश्विक महामारी कोरोना के कारण सबकुछ लॉक डाउन की स्थिति से गुजर रहा हालांकि भारत सरकार ने  यथा सम्भव कोरोना से बचाव हेतु निर्देश दिए है और धरातल पर सरकारी तंत्र के माध्यम से हर सम्भव जरूरत मन्द तक मदद पहुंचाई जा रही है

सम्पर्क
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सरकार अपना कार्य देश हित मे करे ये सभी चाहते है किन्तु कोरोना से कब मुक्ति मिले कोई नही जानता कारण अभी तक इसकी दवा बनी नही और दवा बनने तक घरो में बन्द रहने के अलावा आप कर भी कुछ नही सकते

इसलिये सोचिये कोई भी इंसान ज्वेलरी कब खरीदता है  🤔
 जब घर परिवार में सबकी जरूरतों को पूरा कर ज्यादा पैसा बच जाए तब इंसान ज्वैलरी खरीदता है

या फिर जब परिवार में किसी बच्चे / बच्ची की सगाई /विवाह आदि शुभकार्य करने के समय

इंसान गरीब हो या अमीर अंतर नही पड़ता किन्तु सगाई /विवाह में जरूरत अनुसार ज्वैलरी अवश्य खरीदता है कोई कम तो कोई ज्यादा पर जरूरत सबको पड़ती है

लिखने का उद्देश्य केवल इतना कि ज्वैलरी व्यवसाय दैनिक जरूरत में नही आता

कोरोना से मुक्त होने तक जाने हमारे कारीगर बन्धुओ की आर्थिक दशा क्या हो कहना सम्भव नही

अतः हम चाहते है बेसक आप घरो में रहे किन्तु अपने परिवारो /रिश्तेदारों /मित्रो से सोशल मीडिया या कॉल के माध्यम से सम्पर्क बनाये रखे ताकि उन्हें आपकी और आपको उनकी जरूरतों को समझने में आसानी रहे
आदरणीय आप जानते है सही मायने में किसी की मदद आप तभी कर पाएंगे जब आपको उसकी मजबूरी और  जरूरत दोनो का ज्ञान हो

हमारा मानना है बहुत सी जगह संस्थाए तो मदद कर रही है किन्तु  जरूरत मन्द मदद से वंचित रह जाता है कारण बहुतों की शर्म / स्वाभिमान हाथ फैलाने देते नही और संस्थाओ को उसकी मजबूरी /जरूरत का पता चलता नही

उदाहरण -  संस्थाए भोजन बांट अवश्य रही है किन्तु उन्हें नही पता चलता की जिसे वो भोजन दे रहे है उंसको जरूरत है भी या नही

इसके पीछे की वजह केवल इतनी की कुछ लोग फ्री के लालच में जरूरत से ज्यादा ले जाते है तो कुछ  शर्म /स्वाभिमान के कारण भोजन ले / मांग नही  पाते है

अंत मे केवल इतना कि जरूरत मन्द की मदद समाजहित में अवश्य करे तभी आप समाज एवं बन्धुओ के स्वाभिमान की रक्षा कर पाएंगे !

आज के लिये इतना ही बाकी फिर कभी ----

धन्यवाद

ॐ नमो ---//---

शनिवार, 11 अप्रैल 2020

दुरुपयोग

दुरुपयोग

आदरणीय वैश्विक महामारी कोरोना से बचने हेतु हमारी सरकार ने समय रहते लॉक डाउन किया और जनहित में हर सम्भव अच्छा प्रयास सरकार व अनेको समाजिक संगठन के माध्यम से हो रहा है

सरकार ने एक निर्देश दिया कि आमजन  घरो में रहे ताकि समाजिक दूरी बनी रहे और कोरोना का फैलाव हमारे देश मे नही हो
    किन्तु हुआ क्या बताते है कुछ लोग कोरोना के प्रभाव से अनजान है इसलिये

1.लॉक डाउन का दुरुपयोग  - प्रति दिन लोग  सब्जी /दूध /किरयाना/ दवा लाने के बहाने   बनाकर महिला /पुरुष घरो से निकलते है रस्ते में बहुतों से मिलते होंगे और ऐसे में वो खुद  तो संक्रमित होंगे साथ ही पूरे परिवार को संक्रमित कर देंगे ।
   क्योकि वो नही जानते जिनसे वो मिल रहे उनमे से कौन संक्रमित है कौन नही ऐसे में सोचिये क्या ये लापरवाही जान लेवा नही होगी 🤔

2 पानी का दुरुपयोग - बार बार हाथ धोने के चक्कर बहुत से लोग नल जो तब तक चलने देते है जब तक कि उनके हाथ धूल न जाये जबकि उन्हें चाहिये जी हाथ गीले होने पर नल बन्द करे और अच्छे से 20 सेंकीड तक साबुन से हाथों को घर और से साफ करें तदुपरांत नल चलाकर हाथ धो ले
     क्योकि ऐसा करने से उनकी लापरवाही के कारण जरूरत से ज्यादा पानी नहीं बहेगा  और भविष्य में पीने के पानी का संकट नही रहेगा 
     जल ही जीवन है इसका सदुपयोग करे दुरुपयोग के कारण जल संकट आ सकता है अतः सझग रहे सुरक्षित रहे

3 अन्न का दुरुपयोग - बहुत से संगठन गरीबो को भोजन बांटने के चक्कर मे लापरवाही करते है उन्हें नही पता होता कि उनसे भोजन लेने वाले ने उनके अलावा कितनी जगह से पका हुआ भोजन लिया होगा ऐसे में समझने की बात क्या ऐसे संगठनो /लाभार्थी की लापरवाही भविष्य ने अन्न संकट नही बनेगी ? 🤔

4 समाज भावनाओ का दुरुपयोग - आजकल नए नए संगठन प्रतिदिन हर जगह देखने सुनने को मिलते है जोकि पीड़ित गरीब /बीमार की मदद हेतु स्वयं समाज के धनी बन्धुओ व सरकार से दान /चन्दा लेते है और जनहित में कार्य करते है बहुत से संगठन भोजन /सामग्री बांटते समय फ़ोटो /वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रचारित करवाते है ऐसे में गरीबो का उपहास ही हम मानते है

5 धन का दुरुपयोग - हमारे मतानुसार देश मे धनी बन्धुओ कि कमी नही किन्तु जनहित मे बहुत कम सहयोग करते है जबकि धन जमा करने की होड़ में भूल जाते है अन्न हो या धन एक हद तक ही इंसान दोनों का सदुपयोग कर सकता है जरूरत से ज्यादा होने पर बढ़ते महंगे शौक पूरा करने मे धन का  दुरुपयोग करना आदत बन जाती है  अतः सदुपयोग करे ताकि बचे धन से दुसरो की मदद कर आप नेक कार्य कर सके

आज के लिए इतना ही बाकी फिर कभी

ॐ नमो ---//---

रविवार, 15 मार्च 2020

क्यो टूटते है परिवार ?

*क्यो टूटते है परिवार*

आदरणीय समाज मे समस्याओं की कमी नही  पर आजकल *नवदम्पतियों में अलगाव की स्थिति बनते देर नही लगती कारण बर्दास्त करने की क्षमता कम हो चली है*

*दम्पतियों में अलगाव के अनेक कारण हो सकते है जिनमे से मुख्य रूप से मोबाइल /शक /बहकाव* हो सकते है और अनेक मामलो में शक /बहकावे का कारण भी उनके आपसी रिश्तेदार /मित्र/पड़ोसी या परिवारिक सदस्य को माना जाता है जोकि समाजहित में नही

ऐसे लोग ना तो स्वयं खुश रहते है ना दुसरो की खुशियां बर्दास्त कर पाते है अतः इनसे बचे

समाज मे पहली समस्या विवाह योग्य बच्चो के रिश्ते नही बन रहे और जिनके बन चुके वो एक दूसरे के साथ रह नही पाते

आदरणीय अभी बीते दिनों से अनेक ग्रुप में आपने एक मामला ज्यादा सुना होगा जबकि समाज से इससे बढ़कर भी कुछ मामले विचाराधीन है शायद  *इस मामले को हाइलाइट करने में लड़के के रिश्तेदारों के हाथ मुख्य रूप से हम मानते है सम्भव है वो हमें गलत ठहराने के प्रयास करेंगे पर सच्चाई समाज से छिपी नही लड़कीं ने अपने बेकसूर होने के अनेक प्रूफ भी आप सबके सामने रखे जबकि लड़का स्वयं व उसके परिजन ग्रुपो में जुड़कर ना तो स्वयं के पक्ष में कुछ दिखा पाए है और ना दिखाना /चाहते है इससे साफ ज़ाहिर है कि अब इस विषय को लड़कीं वालो की इच्छा पर छोड़ देना चाहिये क्योकि समझाइस तभी हो सकती है जब दोनो पक्ष अपनी बात रखे एक पक्ष की सुनकर समझाइस नही कर सकते और कुछ बड़े बुजुर्गों ने समझाइस करके पिछली बार लड़कीं को भेजा भी पर लड़के वाले लड़कीं कि कदर करना तो दूर उसके अपमान करने से नही रुके ऐसे में हम अपनी तरफ से इस विषय को अब दोनो परिवारो /परमात्मा की इच्छा पर छोड़ते है हमारी बहन के आत्म सम्मान की रक्षार्थ जो हमसे बन पड़ा वो किया और हर उस बेटी के लिये करेंगे जिसको प्रताड़ित किया जाएगा*

*लड़के वालों को घमण्ड है शायद अपने पैसे / रुतबे का वो नही जानते कोर्ट में उनका पैसा रुतबा उतना काम नही करेगा जितना कि वो समझते है कोर्ट में लड़कीं के पक्ष में अनेक कानूनी धाराएं मौजूद है जबकि लड़के के पक्ष में क्या है ?* स्वयं पता करे

परिवारिक समस्या जब तक घर मे रहे तब तक परिवारिक रहती है जिस दिन समाज मे सोशल मीडिया या अन्य माध्यम से लोगो तक पहुंच जाए तब वो समस्या समाजिक कहलाती है ऐसा हमारा मानना है

एक निवेदन सबके परिवार जोड़ने का प्रयास करे नाकि तोड़ने का


निःशुल्क निःस्वार्थ  के नाम पर आपके साथ धोखा हुआ आगे भी धोखा सम्भव है

अतः अपनी सूझबूझ से किसी की मदद ले और पारिवारिक समस्याएं हर किसी को नही बताये ससुराल /मायके में मोबाइल का जरूरत अनुसार ही इस्तेमाल करे क्योकि अत्यधिक मोबाइक का इस्तेमाल भी परिवार में कलह का कारण बनता है आप थोड़ा सहने की आदत डालें तभी आप सुखी रह पाएंगे

धन्यवाद

ॐ नमो---/---

🙏🏻🌹🙏🏻

सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

प्रेम (अंतरजातीय) विवाह के कारण क्या ?

प्रेम  (अंतरजातीय) विवाह के कारण क्या ?

आदरणीय कहने को प्रेम विवाह पहले भी होते रहे है तब कुछ साल से लवमैरिज (अंतरजातीय विवाह ) की संख्या बढ़ती जा रही इसके कारणों को समझे और निदान का प्रयास अवश्य करे

क्योकि स्वजातीय विवाह में अन्य जाति बन्धुओ से वैर नही होता और नवदम्पति को उसके परिवार /रिश्तेदार व मित्रो का सहयोग /आशीर्वाद सदैव मिलता है जबकि अंतरजातीय विवाह में ऐसा सम्भव नही हो पाता


प्रेम विवाह (अंतरजातीय) विवाह के कारण

1 मीडिया एवं सोशल मीडिया पर हो रहे दुष्प्रचार कारण बहुत सी फ़िल्म प्रेम विवाह पर बनी है और उन सबमें हीरो को ज्यादा बड़ा चढ़ा कर दिखाया जाता है वो अकेला 20 /30/100 /200 को पीटकर आपनी हीरोइन से विवाह रचा कर फ़िल्म का the end होता है

2 एकल परिवारों में माता पिता अपनी सर्विस /व्यवसाय व निजी व्यस्तता के कारण बच्चो पर ध्यान कम देते है और बच्चे टीवी/मोबाइल /व गलत संगत में पढ़कर प्रेम (अंतरजातीय) विवाह करने लगे है

3 आजकल विवाह योग्य बच्चो के संस्कार कोई नही पूछता अब तो केवल बच्चे /बच्ची की सुंदरता /शिक्षा /आमदनी और पैतृक सम्पति देखकर अपने से अधिक सामर्थ्य वान से रिश्ता हर कोई करना चाहता है इन्ही बढ़ती अपेक्षाओं के कारण स्वजातीय रिश्ते  मिलते नही और जो मिलते है वहा दोनो परिवारों की सहमति नही होने से अन्तर्जातीत विवाह करना उचित मानने लगे है

4 परिवारिक /समाजिक बंधनो का अब महत्व कम हो चला है कारण हर कोई आजादी चाहता है लड़के /लड़कीं अपने साथ काम करने वाले या पढ़ने वाली की तरफ आकर्षित होकर प्रेम (अंतरजातीय) विवाह करने लगे है वो परिवारिक /समाजिक बन्धनो में घुटन महसूस करने लगे है शायद

5 समाजिक संस्थाओ में बैठे पदाधिकारी निजस्वार्थ में उलझकर रह गए है उन्हें समाजिक समस्याओं /जरूरतों का पता तो होता है किन्तु समाजहित में हर कोई कार्य करना नही चाहता कुछ बन्धु समाजहित में कार्य तो करते है किंतु उनके प्रयास पर्याप्त नही इस कारण भी प्रेम (अंतरजातीय) विवाह अधिक होने लगे है

6 सरकार से मिल रही सहायता के कारण भी प्रेम (अंतरजातीय) विवाह का बड़ा कारण है कारण इसमे नवदम्पति को सुरक्षा व अन्य सुविधाएं कुछ समय तक उन्हें मिल जाती है ऐसा सुनने में आता है

7 घर परिवार से दूर कार्यरत /शिक्षारत बच्चो को नए माहौल में कुछ दोस्त तो मिलते है किंतु परिवारिक दबाव रहता नही और वो एक दूसरे के प्रति आकर्षण /विचारों के कारण अंतरजातीय विवाह करने लगे है

8 आजकल विवाह में खर्च की अधिकता व अत्यधिक आडम्बरो /दहेज व कुछ अन्य कारण के चलते स्वजातीय रिश्ते नही बन पा रहे और मध्यम /गरीब परिवार अपनी आर्थिक हालात से तंग आकर अपने बच्चों के विवाह प्रेम (अंतरजातीय) विवाह करने लगे है

इन सबके अलावा भी भी बहुत से कारन से प्रेम (अंतरजातीय) विवाह होने लगे है अतः जितना जल्द हो सके इस कुरीति को खत्म कर स्वजातीय विवाह करे ताकि आप अपने परिवार व स्वजायीय बन्धुओ के साथ मिलकर समाज विकास में सहयोगी बने

आज के लिये इतना ही बाकी फिर

ॐ नमो ---//---

🙏🏻🌹🙏🏻
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मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

विवाह में देरी कारण क्या ?

विवाह में देरी कारण क्या ?

आदरणीय समाज मे युवाओं का विवाह समय पर नही होने से विकट समस्या खड़ी हो रही है जिसे सबको मिलकर हल करना चाहिये अन्यथा एक दिन आपके पास धन /बच्चे /बंगला /गाड़ी तो सब होंगे पर बहु /दामाद नही होंगे

कारण क्या

परिवार संगठित नही एकल परिवार में हम दो हमारे दो और सबके बीच वैचारिक मतभेद होने से समय पर विवाह नही हो रहे
उदाहरण - युवक /युवतियां चाहते है ज्यादा पढ़ लिखकर कोई अच्छी सर्विस /व्यवसाय को करने लगे यानी अपने पांव पर खड़े हो जाये फिर शादी कर लेंगे

वही उनके माता पिता चाहते है बच्चे /बच्ची पढ़ लिखकर कोई अच्छा व्यवसाय /सर्विस करेंगे तो रिश्ते बहुत मिल जायेंगे बस यही से गलती होती है बच्चो की शिक्षा 20 से 25 वर्ष में पूरी  होती हैं फिर 2 से 3 साल सर्विस /व्यवसाय को खोजने /करने में लग जाते हैं अब 28 साल के बच्चे हेतु रिश्ते की खोज शुरू तो करते है
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किन्तु परिवारिक बिखराव /रिश्तेदारों से दूरियां /मित्रो से सहयोग नही मिल पाने के कारण
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हर कोई सोशल मीडिया /वेबसाइट के माध्यम से रिश्ते की खोज करने लगा है कारण इसमे खर्च कम /समय की बचत और सुविधा अधिक तो मिलती है किंतु नही मिलता वो है दूसरे पक्ष का समय से जवाब
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कैसे कुछ लोग बच्चो की शिक्षा/सुंदरता /कुंडली/आमदनी /व्यवसाय /सर्बिस के अलावा बच्चे /बच्ची के विवाह में  कितना ज्यादा खर्च कर सकते है और बच्ची दहेज में कितना ला रही है या बच्चे के नाम कितनी जमीन जायदाद /बैंक बैलेंस आदि है को महत्व ज्यादा देने लगते है शुरू के दो तीन साल पसन्द आते नही जो पसन्द आते हैं उनके लिये परिवारिक सहमति बनती नही या फिर दूसरा पक्ष अपनी अत्यधिक अपेक्षाओं के चलते मना कर देता है
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इसी सोच के चलते बच्चे /बच्ची की आयु 35 की हो जाती है फिर लड़कियों के बराबर पढ़े लड़के नही मिलते और जो मिलते है वो पसन्द आते नही किसी की लड़कीं से शिक्षा /आमदनी कम होना
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सोचिये 35 वर्ष की आयु में लड़के और लड़कीं कि आधी जिंदगी निकल चुकी क्योकि अब इंसान 65 की आयु तक जी जिंदा रह पाता है एक अनुमान के अनुसार और 35 वर्ष जीवन के बीत चुके अब जवानी भी ढलने लगी है युवक /युवती मानसिक तनाव के चलते अनैतिक राह पर चलेंगे या फिर किसी बुरी आदत का शिकार होकर जीवन को बर्बाद कर लेंगे अतः जितना महत्व शिक्षा /व्यवसाय /सर्विस /धन को देते है उतना ही महत्व अगर परिवार /रिश्तेदार /मित्रो को देंगे तो शायद इस समस्या का कोई हल भविष्य में निकल भी आए

आज के लिये इतना ही बाकी फिर

ॐ नमो ---//---
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सोमवार, 17 फ़रवरी 2020

समाज पतन के जिम्मेदार कौन ?

समाज पतन के जिम्मेदार कौन ?

आदरणीय समाज पतन के अनेक कारण रहे हैं जिनमे से आज नीचे लिखे कारण समझकर ही पतन को रोक पाएंगे

1 परिवार -
     आदरणीय एक समय था जब सभी परिवार संगठित होकर रहना पसंद करते थे किंतु गाँव /शहर से दूर नोकरी/व्यवसाय हेतु /पुश्तेनी सम्पति के बंटवारे /आपसी वैचारिक मतभेद आदि कारणों से परिवार सिमट कर हम दो हमारे दो तक ही रह गए है और आपसी दूरियां बढ़ने से आज हालात ये है कि विवाह की उम्र निकल जाने पर भी बच्चे /बच्ची के विवाह नही हो रहे

2 व्यापार /व्यापारी -
   आदरणीय एक समय घ जब मालिक नॉकर के बीच पिता -पुत्र /भाई भाई जैसा रिश्ता होता था और सुख दुख में सदैव एक दूसरे का सहारा बनते थे नॉकर व्यापारी का काम लग्न /मेहनत से करता था और व्यापारी उसके सुख दुख में आर्थिक व अन्य मदद करता था जोकि नॉकर को वापिस करने की चिंता कभी नही रही  किन्तु आज व्यापारी नॉकर से ज्यादा काम करवाना चाहता है मेहनताना पूरा देता नही /वही नॉकर मेहनताना ज्यादा और काम करना चाहता है परिणाम दोनो ही अत्यधिक स्वार्थी बनकर रह गए इसलिये आज बेरोजगारी जैसी स्थिति बन गई

3 समाजिक संगठन -
  आदरणीय समाजिक संगठन सदैव समाजहित जरूरतमंद की मदद एवं समाज उत्थान के लक्ष्य से बनते अवश्य है और गरीब /अमीर सभी  सहयोग भी करते है किंतु संगठनों में धनी को पद /मंच/माला /माइको से लगाव है और गरीब को अहमियत कोई देना चाहता नही इसलिये उसका शोषण ही पदाधिकारीअनेक तरह से करते है सरकार से मिलने वाली सुविधा / सहायता हो या समाज से मिला चन्दा सब पर धनी अधिकार जमाकर बैठ जाते है
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4 धार्मिक संगठन -
   आदरणीय एक समय था जब आज की तरह धार्मिक संगठन नही थे बल्कि ऋषि /महृषि /गुरुजन अपनी कुटिया /आश्रम में ही शिष्यों को धर्म की शिक्षा /आमजन को धर्म प्रवचन देकर धर्म का प्रसार करते थे उन्हें आज की भांति धन /पद या राजनीति में रुचि एक हद तक ही होती थी किन्तु आजकल धर्म को भी कुछ ने व्यापार बना रखा है और भक्त जन दिल खोलकर धन देने लगते है परिणाम जरूरतमंद को मदद नही मिल रही और धार्मिक संगठन करोड़ो /अरबो की सम्पति बनाकर बैठ गए

5 राजनीति संगठन -
 आदरणीय किसी भी देश /राज्य की उन्नति /पतन के पीछे ये संगठन बड़े जिम्मेदार होते है राजनीति कोई करे किन्तु उसका लक्ष्य देश /राज्य के हित मे होनी चाहिये किन्तु दुर्भाग्य की बात है राजनीति में कुछ विपक्षियों को देश /राज्य /ग्राम की चिंता नही होती वो तो केवल विरोध करना जानते है ताकि आमजन भृमित रहे और उनकी राजनीतिक पहचान बनी रहे इसके बदले बेसक देश /राज्य का पतन हो उन्हें परवाह नही
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6 मीडिया/सोशल मीडिया  -
आदरणीय किसी भी देश की उन्नति /पतन के लिये ये भी बराबर का जिम्मेदार है इसी के माध्यम से आमजन को सूचनाएं मिलने लगी है और इसके साथ जुड़े बन्धु जैसा प्रचार करेंगे ठीक वैसा ही असर देश /राज्य की जनता के दिमाग मे होगा अगर है देश /राज्य की उन्नति के उद्देश्य से अच्छी जानकारी /सूचनाएं /फ़िल्म /नाटक दिखाए तब तो हर कोई उन्नति के राह पर चलेगा  और वही सोशल मीडिया /मीडिया के माध्यम से आमजन को भृमित /झूठी जानकारी /अश्लील प्रोग्राम /फ़िल्म आदि का प्रसार होगा तो निश्चित ही देश /राज्य का पतन होगा
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7 युवापीढ़ी -
आदरणीय किसी भी देश /राज्य का युवा उसका भविष्य निर्धारित करता है और बचपन से जवानी तक इसने जो सीखा /समझा उसी अनुरूप ये कार्य करता है जिसका परिणाम देश /राज्य को मिलता है इसलिये हर युवा को चाहिये सदैव अच्छा सीखे अच्छे कार्य करने का प्रयास करे और जो कोई भटक रहा हो उसे समझाकर अच्छे मार्ग पर लाये ताकि सबकी उन्नति हो ।

लेख पढ़ने के लिये आपका धन्यवाद ।

ॐ नमो ---//---
आज के लिये इतना ही बाकी फिर

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शनिवार, 15 फ़रवरी 2020

मृत्यु क्या है क्यो नष्ट करते है मृत शरीर ?

मृत्यु क्या है क्यो नष्ट किया जाता है मृतशरीर ?

पूरा लेख पढ़कर ही किसी निष्कर्ष पर पहुचे ताकि बात समझ आये

आदरणीय आज का विषय गहरा है अक्सर आप जब किसी के शरीर मे स्वांश का आवागमन  रुका देख /सुन लेते है तो उसे मृत मान लेते है डॉक्टर भी श्वांस /रक्त के प्रवाह को रुका देख जीव को मृत घोषित कर देते है ऐसा हमने सुना है

किन्तु हमारे मतानुसार ये पूर्ण सत्य नही है

मृत्यु को जनाने के लिये लेख को पूरा पढ़े

मृत्यु को हम अनेक प्रकार की मानते है

मृत्यु के प्रकार 👇🏻

1 शरीर में श्वांस /रक्त के प्रवाह का रुक जाना मृत्यु संसार मानता है

2 हमारे धर्मानुसार कुछ विशेष प्रकार के साधु जिंदा रहते हुए साँसार के तमाम सुख / संसाधन /वैभव त्याग कर स्वयं के पिंड दान कर मृत मान लेते है उसके बाद उनका संसार की मोह माया ममता से कोई रिश्ता नही रहता अगर रहता है तो केवल एक परमात्मा से उनका जप /तप/पूजा /पाठ यानी तमाम वो क्रियाएं जिनसे परमात्मा की प्राप्ती हो वही उनका अंतिम लक्ष्य  कहलाता है क्योकि उनका मानना है परमात्मा से मिलन के बाद पुनः किसी भी शरीर को धारण करने की आवश्यकता नही रहेगी

3 वो जिनकी डॉक्टर /व आमजन अनुसार मृत्यु सेंकडो वर्ष पहले हो चुकी किन्तु उनके प्राण अभी बाकी है कारण सभी धर्मों में मृतक का अलग अलग तरिके से अंतिम संस्कार होता है
उदाहरण -हमारे धर्म मे दाहसंस्कार यानी मृत शरीर को चिता में जलाकर अंतिम सँस्कार होता है
एक अन्य धर्म मे मृतशरीर को धरती में गड्ढा खोदकर यानी कब्र में दफना कर अंतिम संस्कार
 किया जाता है
एक अन्य धर्म के बारे में सुना है वो ना दफनाते है और ना चिता में मृतक को जलाते है वो मृतक को एक बड़ा सा कुवा नुमा खुले स्थान पर रख आते है जहां अनेको प्रकार के मांसाहारी जीव जंतु पक्षी उस मृतक के शरीर को नष्ट कर अंतिम संस्कार कर देते है

सुना है दुनिया मे ऐसे भी हुए है जिनकी सांसारिक रूप से तो मृत्यु बहुत पहले हो चुकी किन्तु प्राण अभी भी बाकी है

उदाहरण  -विदेशो में कुछ मम्मियां ऐसी सुनी है जिनके बाल /नाखून बढ़ रहे है जबकि मृत्यु तो काफी साल पहले हो चुकी

 कुछ सिद्ध साधु संतों का भी सुनने को मिलता है जिनकी मृत्यु तो काफी साल पहले हो चुकी किन्तु अस्थिपिंजर आज भी योग साधना में लीन है यानी ऐसा लगता है वो अभी तक जीवित अवस्था मे साधना कर रहे है

क्यो नष्ट किया जाता है मृत शरीर 👇🏻
आदरणीय आत्मा अमर है इसके लिये शरीर मात्र एक वस्त्र है जिसे परमात्मा की इच्छा अनुसार आत्मा अनेको प्रकार के शरीर को धारण करती है छोड़ देती है और इसी प्रकार ये चक्र चलता रहता है
किस आत्मा ने कौनसा शरीर धारण किया कब छोड़ देगी ये आप हम नही जान पाते हम नवजात को एक नाम देकर सांसारिक पहचान तो देते है और वो पहचान शरीर के नष्ट होने तक ही रहती है उसके बाद आत्मा का  कब कहा किस जाति /प्रजाति में जन्म ले क्या नाम हो कोई नही जानता इन्ही कारणों से सदियों पूर्व समाज के बुद्धिजीवी वर्ग ने मृतक के शरीर को अलग अलग प्रकार से नष्ट करना शुरू किया ताकि उस शरीर मे आत्मा पुनः प्रवेश नही कर सके क्योकि पुनः  प्रवेश अगर कर भी ले तो कौन जान पायेगा वही आत्मा है या अन्य कोई आत्मा है
सभी धर्म अलग अलग प्रकार से मृत मानव शरीर को नष्ट करते है

सारांश - ये आप पर निर्भर है कि आपने लेख को किस नजरिये से पढ़ा और क्या आप समझ पाए जो आपको ठीक लगे वही इस लेख का सार समझ लीजिये क्योकि हर किसी के अपने मान्यता है

साधु संत मानते है कि समाधि लीन शरीर फिर जीवित हो सकता है यानी योग निद्रा जाने कब खुल जाए इसलिये वो शरीर को नष्ट नही करते

सांसारिक लोग मानते है मृतक जिंदा नही हो सकता इसलिये अपने धर्म अनुसार अंतिम संस्कार करते है

वही कुछ विदेशी जिन्होंने मम्मियां रखी हुई है वो भी मानते है मृतक जीवित हो सकता है और इसी कारण वर्षो से मम्मियों को संभाल कर रखे हुए है अन्यथा कब का नष्ट कर देते

लेख पढ़ने के लिये आपका धन्यवाद

आज के लिये इतना ही बाकी फिर

ॐ नमो ---//---

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शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2020

क्या वेलेंटाइन डे मनाना चाहिये ?

क्या वेलेंटाइन डे मनाना चाहिये ?

आदरणीय दुनिया मे हर किसी को अपनी इच्छा अनुसार जीने का अधिकार है
किंतु
क्या एक दिन वेलेंटाइन डे मनाने प्रेम /प्यार का प्रदर्शन उचित है 🤔

 क्या आप अपने साथी से एक ही दिन प्रेम करना चाहेंगे 🤔

साल के बाकी के दिन प्रेम की जरूरत नही क्या आपको या आप बाकी के दिन अपने साथी से प्रेम नही करते 🤔

आदरणीय हम भारतीयों के पूर्वजो का कहना है कि विवाह का बंधन सात जन्म का होता है हर पल जीवनसाथी से प्रेम के पल इंसान कभी नही भूलता

एक सत्य ये भी है कि प्रेम केवल जीवनसाथी या प्रेमिका तक सीमित नही बल्कि  इंसान प्रेम अपने माता पिता भाई बहन पति पत्नी बेटा बेटी मित्र एवं अन्य बहुत से  सदैव करता रहा है और करता रहेगा क्योंकि प्रेम के बिन जीवन मे कुछ भी नही

भक्त भगवान से प्रेम करता है
प्रेमी प्रेमिका से प्रेम करती है
पत्नी पति से प्रेम करती है

कहने का तातपर्य प्रेम अनन्त है इसका उल्लेख शब्दो मे कर पाना आसान नही

अतः मानव जीवन को सार्थक बनाने के सबसे प्रेम कीजिये अपनी जिम्मेदारी निभाईये किन्तु प्रेम /प्यार के नाम पर किसी से धोखा नही करे झूठा प्रदर्शन नही करे और ना ही स्वयं प्यार में किसी धोखे का शिकार बने


ये सब लिखने का कारन केवल इतना कि आज प्यार के नाम पर युवा बहक रहे है अनेको की जिंदगी बर्बाद हो चुकी और जाने कितने ही अभी प्यार /प्रेम को को टीवी /सोशल मीडिया पर दिखावटी /नकली प्यार देखकर बहकने बाकी है कहना सम्भव नही ।।


सारांश - माता पिता अपना दायित्व निभाये अपने जीवनसाथी के साथ प्रतिदिन वेलेंटाइन डे मनाए ताकि आपके प्रेम की कदर हो और आपके बच्चे भी भविष्य में विवाह के उपरांत अपने जीवनसाथी संग वेलेंटाइन डे मना सके  युवा पीढ़ी देश /परिवार का भविष्य है उसको सही मार्ग दिखाना /मार्गदर्शित करना सबका दायित्व है


धन्यवाद

ॐ नमो ---//---

आज के लिये इतना ही

मार्गदर्शन /लेखक -   राधा /महेश

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आजीवन स्वस्थ कैसे रहे ?

आजीवन स्वस्थ कैसे रहे ?

आदरणीय आजीवन स्वस्थ रहना हर कोई चाहता है किंतु स्वयं की लापरवाही के कारण एवं मौसम के कारण रोग आने लगते है

आपने देखा होगा आजकल तो छोटे मासूम बच्चे से लगाकर बुजुर्ग तक दवाओं पर निर्भर होते जा रहे जबकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अगर सही हो तब तो छोटे मोटे रोग स्वयं भी ठीक हो सकते है

बुजुर्गो ने हमारे देश की जलवायु और रहन सहन को देखते हुए हमें अनेक प्रकार के भोजन बनाने /खिलाने तक कि जानकारियां दी हुई है

हमारे रसोई घर मे मौजूद मसाले  /घर के आंगन में लगी तुलसी भी अनेक रोगों की दवा है इनकी जानकारियां होनी चाहिये

आजीवन स्वस्थ बने रहने के लिये आप ये कर सकते है 👇🏻

1 प्रतिदिन सुबह उठते ही कुल्ला करने से पूर्व बासी थूक आंखों में लगाए इससे आपको आंखों सम्बंधित रोग जीवन मे कभी नही होगा बशर्ते आप नियम से करे

2  सुबह आप भर पेट ताजा या गुनगुना पानी पीकर शौच को जाए इससे आपको कभी कब्ज की शिकायत नही होगी और पेट सम्बंधित रोग नही होंगे कारन रात भर से जमा मल निकल जाएगा


3  इसके बाद आप योग /प्राणायाम या सैर आदि जो ठीक समझे कीजिये इससे आपको दिनभर थकावट नही रहेगी और शरीर भी सुदृढ हो जाएगा आते समय या जाते वक्त कही से नीम या बबूल की दातुन तोड़कर /खरीदकर चबाकर मंजन कीजिये इससे दांतो सम्बंधित रोग नही होंगे

4  सुबह इन सबके बाद आपको गाय (गौ) का शुद्ध घी गुनगुना कर दोनो नाक में दो दो बूंद डालकर थोड़ी देर आराम से ऊपर की और खींचना होगा या फिर लेट कर नाक में डलवाये ताकि घी आपके दिमाग तक जा सके इससे आपके दिमाग मे जमा मैल नाक के रस्ते साफ हो जाएगा और आपके दिमाग मे ठंडक बनी रहेगी दिमाग /आंख /नाक /कान सभी को लाभ होगा और स्नान से पूर्व नाभि में सरसों का तेल अवश्य लगाए इसके अनेको लाभ होंगे

5 सुबह नाश्ते में आप दही रोटी /मेवा /लस्सी /दूध /दलिया /फल या अन्य सादा भोजन अपनी रुचि अनुसार करे ताकि दिनभर आपके शरीर को ऊर्जा मिलती रहे  इससे आपके पेट मे गर्मी ज्यादा नही बढ़ेगी

6 दोपहर का भोजन सब्जी /दाल/दही/सलाद /रोटी/चावल /फल खाइए  ताकि आप अपना कार्य ठीक से कर सके और शरीर स्वस्थ रहे

7 दलिया /खिचड़ी /मूंग की धुली दाल /सब्जी /रोटी जो मर्जी खाइए भोजन थोड़ा कम करे ताकि दिन भर में जितना भी खाया है सबको शरीर सुबह तक पचा सके

8 रात्रि सोने से पूर्व दूध लीजिये ताकि आपके शरीर को शक्ति और भोजन नली में रूका भोजन पेट मे चला जाये और सुबह बचा मल शौच के समय बाहर निकल जाए

कहने का तातपर्य इतना आप तली हुई /फ़ास्ट फूड /पहले से तैयार डब्बा /थैली पैक  में रखा भोजन नही खाये अन्यथा अनजाने में रोग के शिकार हो सकते है जो भी खाए या पिये स्वच्छ हो ताजा हो और पौष्टिक हो खूब चबा चबाकर कर खाएं

दिन भर में प्रति 15 से 30 मिनट के अंतराल पर थोड़ा थोड़ा पानी अवश्य पीजिये ताकि पेट भोजन
 को अच्छे से पचा सके

सारांश - भोजन 24 घण्टे में पचा सके भोजन पेट मे सड़ने से अनेक रोग के शिकार हो सकते है आप अतः सजग रहे स्वस्थ रहें

धन्यवाद

आज के लिये इतना ही बाकी फिर ----

ॐ नमो---//---

🙏🏻🌹🙏🏻

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2020

निःशुल्क सेवा बन्द कारण क्या ?

🕹 *आवश्यक सन्देश* 🕹
    13/02/2020

विषय - *मैढ़ स्वर्णकार रिश्ते की फ्री सेवा बन्द करने बाबत*

आदरणीय जैसा कि *आप जानते है बीते वर्षो से मैढ़ स्वर्णकार रिश्ते समाजहित में फ्री सेवा करते रहे है*

तथापि *आपको ये भी याद होगा 1जनवरी 2017 को हमने समाज से मिले कुछ कड़वे अनुभव को देखते हुए निःशुल्क सेवा के साथ सक्षम बन्धुओ की इच्छा से सहयोग राशि भी लेनी शुरू की और आज तक ले रहे है जो ना देना चाहते उनके बच्चों हेतु हम निःशुल्क जितना सम्भव हो प्रयास करते रहे है*

*जिसके परिणाम स्वरूप अनेको बच्चो के रिश्ते बनते है और विवाह भी परिवारों की सहमति अनुसार हो जाते है सभी खुश रहे स्वस्थ रहे यही हमारी कामना है*

आज सन्देश लिखने का कारण ये की आज 12/02/2020 को हमने *अनिता जी सहदेव निवासी गाजियाबाद से कॉल पर बात की कारण हमें एक बेटी के लिये सुयोग्य सर्विस वाला लड़के की तलाश है और अनिता जी सहदेव का बेटा बैंक मैनेजर भी है और उसका रजिस्ट्रेशन स्वयं अनिता जी सहदेव (गाजियाबाद) ने हमारे पास निःशुल्क सेवा में रजिस्टर करवाया हुआ है*

और *आज भी कह रही थी करदो बायो का प्रचार यानी बच्चे का विवाह होने के बाद बायोडेटा प्रचारित होता रहे इनको आपत्ति नही क्योकि निःशुल्क सेवा रजिस्टर है बायोडेटा जेब से देना नही चाहती*

इनके बेटे *राहुल जी का विवाह महीनों पहले हो चुका और हमे ये खबर देना नही चाहती थी इनका कारण तो हम नही जानते जब बात हुई तब स्वयं अनिता जी सहदेव और उनके बेटे राहुल दोनो का हमारे साथ दुर्व्यवहार सुन कर हम कह सकते है समाज  भावनाओ के नाम पर समाज शोषण करना ही इन लोगो का लक्ष्य है* और

 *हमने निर्णय लिया है कि आज के बाद रिश्ते वाली निःशुल्क सेवा को बंद कर देना चाहिये हालांकि इसको बंद करने के पीछे अन्य भी कुछ कारण है*

अतः *कृपया कर रिश्ते वाले कार्य हेतु हमसे निशुल्क सेवा की उम्मीद कोई नही करे*

*केवल ब्लड डोनर और आयुर्वेद जानकारी  हेतु निःशुल्क सेवा जब मर्जी ले सकते है*

कृपया ध्यान दे :- *जिनके भी बच्चों का रजिस्ट्रेशन हमारी निःशुल्क सेवा में हुआ है या उनका विवाह हो गया हो वो बायोडेटा को हमारे पास से हटवा कर कृतार्थ करे* ताकि हम अपनी अन्य सेवाएं समाजहित में दे सके

धन्यवाद

ॐ नमो ---//---


🙏🏻🌹🙏🏻 रिश्तो में सहायक

मैढ़ स्वर्णकार रिश्ते
9034664991
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क्या सामूहिक विवाह होना चाहिये ?


क्या सामूहिक विवाह होना चाहिये ?

आदरणीय इसको समझने के लिये पूरा लेखकर पढ़कर ही अपना निणर्य ले क्योकि हमारे अनुसार सामूहिक विवाह एक अभिशाप (मीठा विष) है जो समय के साथ साथ समाज को निगलने का काम करेगा

कारण आयोजको को तीन जगह से धन मिलता है  सरकार से /समाज के धनी बन्धुओ से /विवाह में शामिल वर /वधू पक्ष से कहने का अर्थ खर्च से अधिक धन आना बड़ी बात नही

जबकि खर्च जमा धन से करने के अवसर कम होते है कारण समाज मे बैठे बन्धुओ का सहयोग हर प्रकार से समाज भावनाओ /निजस्वार्थ के चलते हर तरह से मिलता है आयोजको को

कैसे
ऐसे आयोजनों में तीन प्रकार के बन्धु सहयोग करते है

एक जिनकी आर्थिक मजबूरी है ऐसा विवाह करने की या फिर फ़्री का दान दहेज चाहते हो इनके लिये स्वाभिमान /उसूल से कोई लेना देना नही हो

दूसरे वो जिनको ना तो विवाह करना है और ना ही उनके पास दान /सहयोग करे इतना धन है ऐसे बन्धु आयोजक व सहयोगी के रूप में काम करते है

तीसरे वो जिनके पास धन तो बहुत है बच्चो के विवाह हो चुके या फिर छोटे है केवल नाम प्रसिद्धि या पुण्य लाभ के लिये दान /उपहार देना चाहते है या फिर दान पर इनकम टैक्स में छूट पाने के लिये देना चाहे

हालांकि जिन्हें फ्री दान दहेज पाने /सस्ता विवाह  करने की इच्छा हो वो करे हमे आपत्ति नही क्योकि ऐसे विवाह के बाद आप समाज के सामने सिर उठाकर बोलने लायक नही रहेंगे अगर आपने प्रयास किया तो कोई भी आपको या आपके परिजनों को सामूहिक विवाह की याद दिलाकर झुकने पर मजबूर कर सकता है


स्वाभिमान / सच्चाई और उसूलों को पसन्द करने वाले बन्धु  समझौता नही करना चाहेंगे किसी भी कीमत /लालच में आकर सामूहिक विवाह कदापि नही करेगा बेसक मंदिर में चुनरी उड़ा कर या कोर्ट मैरिज कर या फिर आर्य समाज मे विवाह कर वधु घर लानी पड़े या विदा करनी पड़े

देखा जाए तो कोर्ट मैरिज से सस्ता /बेहतर अन्य विवाह हो ही नही सकता कारन सरकारी नियम  है कि विवाह आप जहाँ मर्जी करे किन्तु रजिस्टर्ड करवाना आवश्यक हो गया है और आप विवाह के लिये जमा पूंजी से घरेलू जरूरत अनुसार सामान खरीद भी सकते है एक स्वाभिमानी को और क्या चाहिये यही ना सदैव सिर उठाकर जिओ तो मजा ज्यादा आता है जीने का



दूसरे वो जिन्हें स्वाभिमान /सच्चाई और उसूलों से कोई लेना देना नही केवल स्वार्थ पूर्ति होनी चाहिये बेसक कुछ भी करना पड़े यही लोग अक्सर धोखा करते /पाते है कही रिश्ता करवाने के नाम पर बीच मे हजारों /लाखो डकार जाते है जिनका कही जिक्र तक नही होता  तो कही विवाह के उपरांत बच्चे /बच्ची कातलाक या/शोषण के रूप में

तीसरे सामर्थ्य वान जो दान /उपहार देकर नाम कमाना चाहते है इनकी कोई गलती नही किन्तु ये खुद भी धोखे का शिकार बनते है कारण इन्हें खुद ये नही पता होता कि आयोजको ने इन जैसे कितने सेंकडो /हजारों बंधुओ से लाखों रुपया जमा तो किये किन्तु हिसाब आधा अधूरा दिया या फिर उपहार विवाहित जोड़ो को मिला ही नही

आपने एक बात और देखी सुनी होगी आयोजक या उनके सहयोगी चन्दा /दान मांगने आपके घर दुकान तक पहुंच जाते है बेसक आप उनके राज्य में ना हो तब भी इसके पीछे है उनका निजस्वार्थ आने से दान /उपहार की बुकिंग भी होगी और किसके यहां विवाह योग्य बच्चा /बच्ची है और परिवार की आर्थिक स्थिति क्या है सब देख लेते है यही से इनका खेल शुरू होता है

धनी परिवार इनको लालच देकर अपने बच्चे /बच्ची के लिये रिश्ते पूछने लगते है बेसक उनका बच्चे की आयु ज्यादा हो या अन्य शारिरिक कमी हो या फिर रिश्ता मिल नही रहा हो उन्हें तो विवाह करवाने की इच्छा है बेसक जो मांगो देने को तैयार रहते है


अतः सामूहिक विवाह ना स्वयं करे और ना दुसरो को प्रेरित करे क्योकि स्वाभिमान से बढ़कर धन नही और जिसका स्वाभिमान चला गया वो बेसक करोड़पति /अरबपति हो जावे स्वाभिमान लौटकर नही आता कभी

सारांश - विवाह कोर्ट /मंदिर या अपने घर /धर्मशाला जहाँ मर्जी करो पर फ्री के सामान की खातिर या अन्य स्वार्थ के वशीभूत होकर सामूहिक विवाह नही करे ना ही करवाये इसके दूरगामी परिणाम भुगतने पड़ सकते है

विवाह कम पैसे में भी होता है और अरबो रुपये में भी आपका जितना सामर्थ्य हो आप अपने अनुसार स्वयं के दम पर कर सकते है केवल थोड़ा संयम से काम लेना होगा

ये लेख हमारे निजी विचार व कुछ बन्धुओ की भावनाओ को सुनकर पढ़कर लिखा गया है जरूरी नही आप सहमत ही हो आप को जो उचित लगे कीजिये बताना हमारा फर्ज है मानो ना मानो मर्जी आपकी

धन्यवाद

ॐ नमो---//---
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मंगलवार, 11 फ़रवरी 2020

दहेज क्या है इसका अंत कैसे हो ?

दहेज क्या कैसे अंत हो इस कुप्रथा का ?

आदरणीय  दहेज समाज के लिये बड़ी समस्या बनता जा रहा है इसके कारन अभी तक अनगिनत बहन /बेटियां की खुशिया छीन चुकी है बहुत सी बहन बेटियां की जीवन लीला समाप्त हो चुकी इसका अंत जितना शीघ्र हो अच्छा रहे

दहेज क्या है ? 👇🏻

वर पक्ष लालच वश वधु पक्ष से की गई मांग जिसमे रुपया/जेवर/कपड़ा/जमीन  या अन्य जो कुछ मांग में शामिल हो दहेज कहलाता है

वधु पक्ष अपनी बच्ची की खुशियों के लिये देना मजबूरी /इच्छा मानते है क्योंकि वो भी चाहते है उनकी बेटी का विवाह उससे अधिक गुणवान ओर धन सम्पन्न वर से हो

दोनो ही पक्ष भूल जाते है दुनिया मे किसी भी रुपये /जेवर/ या वस्तु को ले /देकर परिवारों में खुशियां नही लाई जाती 

दहेज एक ऐसा मीठा लालच है जिसे लग जाये बढ़ता ही जाता है

और समय के साथ बढ़ती वर पक्ष की मांग एक दिन वधु को तलाक लेने पर मजबूर करती है या फिर दहेज के कारण वधु के जीवन का अंत हो जाता है

बहुत सी ऐसी बहन बेटियां समाज मे देखने को मिलेंगी जो पति से अलग रह रही है बहुत के साथ उनके छोटे मासूम बच्चों को भी पिता /माँ दोनो में से कोई एक से दूर रहना पड़ता है

सोचिये क्या गलती है उन मासूम बच्चों की जिनकी माँ अब दुनिया मे नही या फिर अपने पति से अलग रह रही क्या बीतती होगी उनके दिल पर 😇😇

कटु सत्य तलाक हो या वधु के जीवन का अंत दोनो ही परिस्थितियों में दुःख बहुतों को होता है

इसलिये प्रण लीजिये दहेज लेना और देना बंद करेंगे

अपने बच्चे /बच्ची  के व्यवहार /संस्कारो के अनुकूल वर /वधु की तलाश करेंगे ताकि दोनो के विवाहित जीवन मे खुशियां सदैव बनी रहे

माता पिता को चाहिये अपने बच्चों को जीवन मे आये सुख / दुख के क्षणों में मार्गदर्शन करते रहे नवविवाहित को भटकने से बचाये

जीवन मे जितना आपके पास हो उतने में सन्तुष्ट रहे या फिर अपनी लग्न /मेहनत से हासिल करे

किसी अन्य को मजबूर करके लिया सामान आपके घर /बैंक खाते की शोभा तो अवश्य बढ़ा देगा किन्तु बदले में आपके परिवार की खुशियां छीन लेगा

दहेज लालची वर पक्ष को समझना चाहिये  आज जो कुछ दुसरो से ले रहे है उससे ज्यादा खुद की बहन /बेटी के ससुराल वालों को देना पड़ सकता है और आवश्यक नही की सब दे देने के बावजूद भी आपकी बहन /बेटी को खुशी मिल सके


भावार्थ - दहेज रूपी कुरीति का अंत कर रिश्तो में प्रेम और सामंजस्य बनाये रखे ताकि दम्पतियों का जीवन बिखरने से बच सके और सबको खुशी मिलती रहे

आज के लिये इतना ही

धन्यवाद

ॐ नमो---//----

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समाज मे आपसी सौहार्द कैसे रहे ?

समाज मे आपसी सौहार्द्र कैसे रहे

आदरणीय आपसी सौहार्द्र यानी आपसी सहयोग की भावना एक दूसरे का सम्मान करते हुए समाज मे आपसी एकता व समाज को उन्नत किया जा सकता है ऐसा हमारा मानना है

आपने बुजुर्गो से सुना होगा आजदी के बाद देश भर में आपसी भाईचारे की भावना से एक दूसरे दूसरे को सहयोग करते रहे जिसका लाभ देश की जनता को अनेक प्रकार से हुआ

किन्तु
आजादी के बाद समय के साथ हर कोई खुद को बदलने में ऐसा लगा कि परिवारों में बिखराव और  आर्थिक भेदभाव आपस मे उत्पन्न हुए

आर्थिक अंतर पहले भी था किंतु महसूस नही हो पाता था कारण आपसी सहयोग को ततपर समाज भाई बन्धु जो सुख दुख में सदैव साथ रहे

क्या आज आपसी सौहार्द है 👇🏻
यहां दो तरह के विचार मिलेंगे

1 कोई किसी का साथ नही देता सब मतलबी हो गए ये पूर्ण सत्य नही साथ अब भी देते है किंतु निजस्वार्थ से साथ देना पसन्द करते है
उदाहरण - बड़े व्यापारी के साथ अगर कुछ हो जाये तो सब साथ होने का दिखावा करेंगे कारण वो सामर्थ्य वान है और  उनमे से अधिकतर के अलग अलग स्वार्थ निहित है
किन्तु
अगर उस व्यापारी के कर्मचारी के साथ कुछ गलत हो जाये तो अधिकतर उससे किनारा करेंगे कारण वो कमजोर है किसी का साथ दे पाए ऐसा जरुरी नही

अभी ये मात्र शुरुवात है आने वाले समय मे बहुत कुछ देखने को मिलेगा अगर ऐसे ही चलता रहा

अभी भी समय है आपने से कमजोर वर्ग का साथ दो तभी आप समाज मे आपसी सौहार्द बना सकेंगे

अन्यथा ये संस्थाए /पद /करोड़ो का बैलेंस तो आपके पास होगा पर नही होगा समाज का साथ कारण समाज को कभी आपने अपना माना ही नही 😇😇


भावार्थ -सौहार्द के लिये अहम और वहम दोनों का त्याग करना होगा अहम इस बात का की मेरे पास सब है कोई मेरा क्या बिगाड़ लेगा मैं क्यो किसी का साथ दु और वहम इस बात का की मेरे पास सब है मेरे दुख सुख में साथ देने वालो की कमी नही ।

दुनिया का एक सत्य ये है कि हर कोई अकेला आया अकेला जाएगा  इसलिये इस जीवन को स्वयं के और दूसरों के हित मे लगाओ तभी जीवन सफल होगा अन्यथा स्वयं के लिये तो जानवर भी जिंदा रहते है


जानवर मत बनो इंसान बन अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करो परिवार व समाजहित में

आज के लिये इतना ही ----//---

धन्यवाद

ॐ नमो ---//----


मार्गदर्शन /लेखक -  राधा /महेश

शनिवार, 8 फ़रवरी 2020

मृत्युभोज का बिगड़ता स्वरूप क्या हो समाधान?

मृत्युभोज का बिगड़ता स्वरूप क्या हो समाधान ?

आदरणीय आप जानते है जीवन मरण दुनिया मे लगा रहता है यानी जिसका जन्म हुआ उसका मरण भी निश्चित समय पर होगा
लेख को पूरा पढ़े ततपश्चात अपना निर्णय ले सम्भव है आप हमारी बातों से सहमत ही होंगे

मृत्युभोज क्यो आवश्यक है ? 👇🏻

आदरणीय दुनिया मे हर जीव को स्वस्थ रहने के लिये भूख अनुसार भोजन करना आवश्यक है भोजन कब कहा कैसा होगा ये कोई नही जानता

उदाहरण 👇🏻
आप परिवार सहित शहर /गांव से दूर सफर में है जहां सुबह से शाम हो जाये तब आप क्या करेंगे आस पास किसी होटल /रेस्टोरेंट या किसी परिवार की सहायता से भोजन का प्रबंध करेंगे या नही सोचिये अवश्य करेंगे क्योंकि आप जानते है भोजन के बिन शरीर को चलायमान रख पाना सम्भव नही
इसी लिये सदियों पूर्व पूर्वजो ने सोच विचार कर विवाह के समय अलग भोजन यानी अच्छे से अच्छा भोजन खिलाने की प्रथा चलाई
वही किसी की मृत्यु होने पर दुःखी परिवार को सांत्वना देने और उसकी यथा सम्भव सहायता के लिये दूर दराज से आये परिवार /रिश्तेदार एवं मित्रो के लिये सादा भोजन बनाने की प्रथा चलाई कारन शोकाकुल परिवार में उन दिनों 12 दिन शौक स्वरूप भोजन नही बनता था और 13वे दिन सभी मिल बैठकर उसके यहाँ भोजन कर उसे दुख में सहभागी और सदैव सहयोगी होने का अहसास करवाता था ताकि वो परिवार दुख से उभर कर फिर से जीवन की धारा में सबके साथ आगे बढ़े

दुखी परिवार की सहायता कैसे 👇🏻
आदरणीय  शौक के दिनों में आये परिवार /रिश्तेदार व मित्रगण उस परिवार के बारे में मिल बैठकर परामर्श करते थे जिससे शोकाकुल परिवार की मदद हो सके
उदाहरण 👇🏻
शोकाकुल परिवार में आगे कमाने वाला है या नही उनके बच्चों की आयु क्या है बेटे /बेटी की शिक्षा कहा तक हुई उस परिवार की आर्थिक स्थिति क्या है सब पर विचार कर एकमत से निर्णय लिया जाता था
आर्थिक कमजोर को धन /शयिग देकर  रोजगार /कारोबार में मदद

विवाह हेतु बच्चो के विवाह की जिम्मेदारी लेकर

बुजुर्ग को उसकी जरूरत अनुसार मदद कर
व
रोगी का उपचार करवाकर मदद करना लक्ष्य होता था

क्या मृत्युभोज आवश्यक था ? 👇🏻
जी हां भोजन शरीर के लिये आवश्यक है और शौक के समय भोजन कर पाना बड़ा कठिन कार्य होता है कारण एक तरफ पेट की भूख तो दूसरी और शोकाकुल परिवार का दुःख इसी कारन उसे मृत्युभोज का नाम दिया गया ताकि हर कोई भोजन तो अवश्य करे पर शोकाकुल परिवार की मदद किस तरह की जाए ये अवश्य याद रखे

शुरुवात में मृत्युभोज कैसा था 👇🏻
आदरणीय शुरुवात में मृत्युभोज बेहद सादा और बेस्वाद बनता था कारण दुखी मन से बनाया भोजन कभी स्वादिस्ट हो ही नही सकता और सांत्वना देने हेतु आये बन्धु वहां स्वाद नही बल्कि शोकाकुल परिवार को सांत्वना और मदद  सदैव का प्रयास सदैव करते थे

मिली जानकारी अनुसार उस समय

बच्चे या जवान मौत के समय में सादी दाल या मौसम अनुसार कोई सब्जी बनती थी और रोटी पर घी नही लगाया जाता था

किन्तु
अगर मरने वाला कोई बुजुर्ग हो जिसने अपने जीवन की हर जिम्मेदारी निभा ली हो उसका परिवारजन जीवित और खुशहाल हो तब मृत्युभोज में एक मिष्ठान भी रखा जाता था और इसके पीछे का कारन केवल इतना कि जिम्मेदारी निभाकर अपनी आयु पूर्ण कर दुनिया से विदा होने पर दुख नही अपितु उसके परमधाम जाने की खुशी होती थी और हर कोई यही सोचता था कि मैं भी उनकी तरह अपनी जिम्मेदारी निभाकर और परिवार को खुशहाल देखता हुआ दुनिया से विदा ले सकू

मृत्युभोज का स्वरूप क्यो बिगड़ा क्या है समाधान ? 👇🏻
आदरणीय किसी भी रीति /कुरीति के जनक समाज मे प्रबुद्धजन व धन सम्पन्न बन्धु ही होते है
और ये बन्धु सदैव खुद को समाज से बढ़कर मानते है अब इनके पास धन है और ये धन का सदुपयोग करे या दुरुपयोग इनको रोकना टोकन सब व्यर्थ है कारन दुसरो की सुनना /मानना आदत नही इनकी ये तो वही करेंगे जिसमे इनकी शौहरत /धन का प्रदर्शन हो ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा इनकी तारीफ करे

इन्हें अंतर नही पड़ता शायद किसी के दुख दर्द से बस इसलिये बीते कुछ वर्षों से इन्होंने मृत्युभोज को भी राजसिभोज बना दिया

शौक के समय मृत्युभोज में ये अनेको प्रकार के मिष्ठान व पकवान बनवाने लगे और समाज का माध्यम वर्ग इनकी नकल करते हुए ऐसा ही करने लगा बेसक कर्ज उठाकर मृत्युभोज क्यो न बनवाना पड़े पर बनवाता अवश्य है क्योंकि वो स्वयं को किसी से कम नही समझता
और निम्न वर्ग तो सदैव दुसरो की दया पर जीवित रहा है जैसा दुसरो ने खिलाया खा लिया जैसा दुसरो ने कहा कर दिया जैसे कि उसका कोई अस्तित्व ही नही हो बस दुसरो के अधीन होकर रह गया

इस कुरीति को सुधारने केउपाय ये है  👇🏻

1 स्वयं के प्रण लीजिये किसी के भी यहां मृत्युभोज में किसी प्रकार का राजसी भोजन नही करूँगा बल्कि अन्य कोई विकल्प हो तब तो वहां भोजन ही नही करूँगा करना ही पड़े तब भी पानी या सादा भोजन ही करूँगा अन्य सभी प्रकार के पकवान /मिष्ठान का बहिष्कार करूँगा

2 अपने यहां मृत्युभोज में सादा दाल /सब्जी रोटी ही बनवाऊंगा अन्य किसी प्रकार के मिष्ठान भोजन में नही रखूंगा

3 मेरे अन्य परिवार व मित्रो को भी मृत्युभोज में सादा भोजन ही रखने को प्रेरित करुंगा ताकि आये बन्धु भूखे नही रहे और पूर्वजो द्वारा चलाई रीति की रक्षा भी हो सके

भावार्थ - मृत्युभोज में सिम्पल सादा भोजन ही हो और शोकाकुल परिवार की मदद को लक्ष्य रखे ताकि एक दूसरे के सही मायने में साथी बन सके अपने धन का अनावश्यक प्रदर्शन मृत्युभोज में उचित नही

आज के लिये इतना ही -----


ॐ नमो ----//----

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2020

उन्नति (लक्ष्य) कैसे प्राप्त करे ?

उन्नति (लक्ष्य
) कैसे प्राप्त करे ?

आदरणीय समाज मे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी उन्नति करना चाहते है इसके लिये दिन रात के अथक परिश्रम को करने के बावजूद भी उन्नति अपनी इच्छा अनुसार नही कर पाते
कारण इंसान का चंचल मन सदैव उसे लक्ष्य से भटकाने का काम करता है

इसके लिये हमें प्रथम ये समझना होगा कि उन्नति चाहिये कौनसी

1 समाजिक उन्नति
(इसमे घर परिवार /रिश्तेदार/मित्र सभी का आपसी सहयोग व इंसान के अपने अच्छे कार्य उन्नति कारक होते है)

2 आध्यात्मिक उन्नति -
( इसमे इंसान दो तरह से उन्नति कर सकता है एक परिवार में रहकर जिम्मेदारी निभाते हुए समय निकाल कर परमात्मा के भजन /आरती /पूजा पाठ/ व दान पुण्य के माध्यम से उन्नति करता है 
दूसरा सन्यास धारण कर यानी घर परिवार त्याग कर परमात्मा की प्राप्ति ( खोज ) में प्रतिदिन तप /जप/ ध्यान आदि के माध्यम से उन्नति करता है ।)

क्या कारन है उन्नति इच्छा /कर्म अनुसार नही हो पाती -
इसके लिये उदाहरण को समझिये

उदाहरण 👇🏻
जैसे एक छोटे बच्चो के समूह को लीजिये उसकी उन्नति का माध्यम है शिक्षा परिवार व अध्यापकों के पूर्ण प्रयास के बावजूद भी कुछ बच्चे सफल और कुछ असफल हो जाते है कारण सफल हुए बच्चो का मन का शिक्षा प्राप्ति में लगा और असफल बच्चों का मन भटका उनका ध्यान शिक्षा प्राप्ति में नही लग पाया ।


यानी कुल मिलाकर इंसान के मन का भटकाव /आलस्य / रोग  आदि उन्नति में रुकावट बनते है

इनसे निजात कैसे पाएं ताकि सम्ह रहते लक्ष्य प्राप्ति हो

1 प्रथम आलस्य का त्याग करें
2 मन को स्थिर यानी कर्म में ध्यान लगाएं
3 रोग का इलाज समय से करवाये
4 शुरुवात में लक्ष्य छोटे (नजदीक) के रखे ताकि आप उनकी सीढ़ी बनाकर अपनी मंजिल (लक्ष्य) तक पहुंच सके

उदाहरण -👇🏻
छोटा बच्चा एक दिन में तेज धावक ( दौड़ने वाला) नही बन सकता वो शुरुआत सहारा लेकर खड़े होने से करता है और फिर बिन सहारे के चलने से लेकर तेज दौड़ लगाने योग्य बन जाता है उसी प्रकार आप छोटे छोटे लक्ष्य को प्राप्त कर बड़ा लक्ष्य ( उन्नति ) हासिल कर पाएंगे

आदरणीय यहां कुछ और भी समझने की आवश्यकता है परिवार में रहकर आध्यात्मिक उन्नति के लिये पहले परिवारिक माहौल को समझना चाहिये क्योंकि धार्मिक विचार परिवार में आपको जो माहौल मिल सकता है वो कुविचार वाले परिवार में नही मिल सकता वहां आप परिवारिक जिम्मेदारी तो आसानी से निभा सकते है पर अध्यात्म के लिये आपको पहले धार्मिक माहौल बनाना होगा या फिर एकांत में ध्यान लगाकर अपने गुरु के बताये मार्गदर्शन से आप उन्नति कर सकते है

घर परिवार के संग रहकर आपको अनेक परिवारजन /अध्यापक /मित्र /बन्धु /बांधवों से मार्गदर्शन /सहयोग मिल जाता है
किन्तु
सन्यास में गुरु के सानिध्य में रहकर या उनकी आज्ञा से आपको अपनी मंजिल तक स्वयं बढ़ना होता है

अतः उन्नति चाहिये तो पहले अपनी मंजिल (लक्ष्य) को पहचानिये क्या चाहिये आपको धन दौलत /परिवार /रिश्तेदार/मित्र /बंगला /गाड़ी या फिर मोह /माया को त्याग  एकांत वास् केवल परमात्मा की प्राप्ति  इच्छा आपकी जो सही लगे आगे बढिये मंजिल (लक्ष्य) तक पहुच जाएंगे

भावार्थ - लक्ष्य से भटकिये मत सच्चाई से कर्म करते चले अपने गुरु /परिवार में विस्वास रखे आप उन्नति करते हुए मंजिल को प्राप्त कर सकते है !

आज के लिये इतना ही बाकी फिर कभी

धन्यवाद

ॐ नमो ---//---

प्रेम (अपनत्व) क्या है?

प्रेम (अपनत्व) क्या है ?

आदरणीय ये तो एक अहसास है अपने (अपनत्व)
होने  का जिसमे आप दुसरो के हित मे सदैव त्याग /समर्पण /सेवा को तैयार रहते है इसमे किसी की आयु /जाति/ रंग/रूप आदि रुकावट नही बनते कभी

कुछ लोग प्रेम को प्रेमिका प्रेमी या पति पत्नी तक सीमित नजरिये से देखते है जोकि उचित नही

प्रेम (अपनत्व) के बिना संसार मे जीवन की कल्पना नही की जा सकती कारण इसके बिन तो सब एक दूसरे के शत्रु ही होंगे जिससे किसी का भला कभी नही हुआ नुकसान बार बार हुआ

आपने देखा होगा कुछ लोग आपके जीवन मे अचानक से सोसल मीडिया या धरातल के माध्यम से आये जिनसे आपका परिवारीक /समाजिक कोई सम्बन्ध नही किन्तु वो अपने कार्यो /विचारों के माध्यम से सदैव आपसे प्रेम (अपनत्व ) प्रकट करते रहते है फिर वो दूर रहे या आपके आस /पास इससे अंतर नही पड़ता क्योकि उन्होंने आपके मनमस्तिष्क में अपने प्रेम (अपनत्व) के लिये स्थान बना लिया है

प्रेम (अपनत्व) को समझने के लिये कुछ उदाहरण दिए है पढिये और अमल कीजिये

1 अपनो से प्रेम (
अपनत्व) -
आदरणीय इसी प्रेम (अपनत्व) की भावना से प्रेरित होकर इंसान सदैव अपने परिवार /रिश्तेदार व मित्रो की सेवा /सहयोग कर सबके हित मे लगा रहता है और एक दूसरे से प्रेम (अपनत्व) ही हमे विकास (उन्नति) की और अग्रसर करते रहे है

2 पड़ोसी का पड़ोसी से प्रेम -
    आपने देखा होगा आपके आपके आस पास ऐसे बहुत से लोग रहते है जिनसे आपका परिवारिक या जातीय कोई रिश्ता नही किन्तु आपके सुख /दुःख में सदैव आपके साथ खड़े रहते है कारण क्या 🤔कारण केवल इतना वो आपको अपना मानते है आपसे प्रेम (अपनत्व) की भावना रखते है इसलिये सदैव आपके सहयोग को तैयार रहते है

3 घर परिवार से दूर प्रेम (अपनत्व) -
घर /परिवार व पड़ोसियों से दूर अकस्मात दुर्घटना का शिकार पीड़ित महिला/पुरुष या बच्चा कोई भी हो उनकी मदद करने जानते है क्यो आते है क्योंकि इंसानियत रूपी प्रेम (अपनत्व) की भावना उन्हें आपकी मदद हेतु प्रेरित करती है

4 सृष्टि से प्रेम (अपनत्व) -
आदरणीय सदियों से इंसान ने पेड़ /पौधे/पशु /पक्षी व जीव जंतुओं की रक्षा सुरक्षा के लिये सदैव प्रयास किया है हालांकि कुछ जगह डर/लालच या अन्य स्वार्थ वश इंसान इन सबका दुश्मन भी बना और परिणाम स्वरूप खुद का जाने /अनजाने में नुकसान भुगत रहा आपने देखा होगा सुबह के समय पक्षी /पशु /और पेड़ पौधे सदैव इंसान को खुशी /सुख का सन्देश देते है हर कोई अपने कर्म को माध्यम बनाकर संसार मे एक सन्देश देता है प्रेम (अपनत्व ) से बढ़कर कुछ नही पेड़ पौधों से आक्सीजन /पक्षियों से मधुर संगीत /पशुओं से दूध /घी /दही /मक्खन आदि यानी सभी से कुछ न कुछ उपहार इंसान को मिलता है इसलिये सबका रक्षण कर अपना कर्तव्य निभाये तभी आप खुशी /सुख पूर्वक रह पाएंगे

भावार्थ - आपस मे सबसे प्रेम (अपनत्व) रखे सबका साथ दे ताकि हर कोई सुख /शांति से रहे और जीवन मे उन्नति करे

किसी के दूर होने से प्रेम (अपनत्व) खत्म कभी नही होता अतः अपने रिश्तो को संजोकर रखे हमेशा  क्योकि इंसान रूपी देह फिर मिले ना मिले कहना सम्भव नही

आज के लिये इतना ही बाकी फिर कभी -------//----------

धन्यवाद

ॐ नमो ---//---

🌸🙏🏻🌸
मार्गदर्शन /लेखक  -  राधा /महेश

बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

पक्के साधक (सेवक) कैसे बने ?

पक्के साधक (सेवक) कैसे बने?

आदरणीय आप जानते है इस संसार मे सेवा से बड़ी पूजा कोई नही  सेवा आप तीन प्रकार से कर सकते है
1 तन से
2 धन से
3 मन से

आपका तरीका जो मर्जी रहे पर सेवा करने से पूर्व आपको साधक (सेवक)बनने के भावना/गुण /दृढ़ संकल्प लेने की इच्छा शक्ति होनी चाहिये

साधक (सेवक) भी दो प्रकार के होते है एक वो जो सभी उतार चढ़ाव हर स्थिति /परिस्थितियों में स्वयं को स्थिर रख सके यानी पक्के  साधक

दूसरे वो जिन्हें अभी ज्यादा ज्ञान नही शुरुवाती दौर में है ऐसे साधक शुरुवात तो कर लेते है किंतु साधना (सेवा) के मार्ग में आने वाली रुकावट यानी स्थिति /परिस्थितियों का ज्ञान इन्हें नही हो पाता

इसके लिये एक सुयोग्य /समर्थ गुरु की आवश्यकता सबको पड़ती है आप गुरु किसे चुने ये आपकी
इच्छा व परख (अनुभव) शक्ति पर निर्भर करेगा

आज का विषय पक्के साधक ( सेवक )कैसे बने ?

एक बार एक शिष्य ने अपने गुरु से पूछा गुरु जी सुना है दो प्रकार के साधक (सेवक) होते है क्या ये सही बात है

गुरु ने कहा हाँ सत्य है चलो तुम्हे दिखाकर बताता हूं

गुरु जी अपने शिष्य को एक बुजुर्ग कुम्हार के पास ले गए और बोले हमे पानी के लिये मटका चाहिये
  कुम्हार ने कहा महाराज मेरा शरीर अब बुजुर्ग हो चला है मटके बना नही सकता आप मेरे बेटो के पास जाए वो आपको अच्छा मटका छांटकर दे देंगे

गुरु शिष्य पहले छोटे बेटे के पास गए बोले पानी के लिये मटका दीजिये छोटे बेटे ने कहा महाराज में आपको पक्का मटका देने में असमर्थ हु कारण मेरे बुजुर्ग पिता से मैंने मटका बनाने की कला तो सीख ली पर मटका पकाना मैं नही जानता हूं और बड़े भाई से मैं किसी कारन वश सीखना नही चाहता अतः क्षमा करें आप मेरे बड़े भाई के पास जाए वो आपको पानी के लिये अच्छा मटका उपलब्ध करा देंगे

फिर गुरु जी और शिष्य कुम्हार के बड़े बेटे के पास गए और कहा पानी के लिये मटका दीजिये
  उसने कहा महाराज कितने चाहिये गुरु जी ने कहा पहले दिखाओ कैसे बने है फिर ले भी लेंगे कुम्हार के बड़े बेटे ने कुछ मटके अलग अलग रख दिये और उनमें से दो मटके उठाकर कहा महाराज ये लीजिये ये कच्चा है ठीक से पकाई नही हुई बिखर सकता है और दूसरा मटका पका हुआ है अच्छा रहेगा गर्मी में पानी ठंडा रहेगा इसमे

गुरु ने कहा तुन्हें कैसे पता पानी ठंडा रहेगा इस मटके में  तब कुम्हार के बड़े बेटे ने कहा महाराज कुम्हार का बेटा हु मिट्टी के प्रकार व गुण को जानता हूं और मटका बनाने का कार्य बीते 20 साल से कर रहा हु इसलिये निश्चिंत होकर मेरा दिया मटका ले जाये पानी ठंडा रहेगा गर्मी के दिनों में

गुरु शिष्य ने मटका लिया और वापिस आश्रम पहुंच गए

गुरु ने शिष्य से पूछा क्या शिक्षा मिली बताओ

तब शिष्य ने कहा गुरु जी मुझे समझ आ गया है कि उन दोनों के गुरु (पिता) एक होते हुए भी छोटा बेटा कच्चा (अधूरे ज्ञान वाला) रह गया और बड़ा बेटा (मटका बनाने की कला को पूर्ण सीखकर) पक्का बन चुका

अब से प्रयास करुंगा आपके सानिध्य से मिले ज्ञान (कला) को मैं पूर्ण सीखकर हर स्थिति /परिस्थिति में अडिग रहकर  जनहित में साधना/ सेवा (सदमार्ग )को अपना सकू ताकि सबका भला हो


भावार्थ - आपके गुरु कोई भी हो उनसे मिले ज्ञान को पूर्ण सीखकर  जनहित में लगाये तभी आप पक्के साधक (सेवक)  कहलायेंगे अन्यथा कच्चे मटके की तरह बिखरना सम्भव ।

धन्यवाद

ॐ नमो---//---

सोमवार, 20 जनवरी 2020

बुजुर्गो को आपसे क्या चाहिये?

आदरणीय आज का विषय है बुजुर्गो को आपसे क्या चाहिये  कहने को तो इंसान की इच्छाओं /अपेक्षाओं का अंत नही
किन्तु

हमारा मानना है 60+ की आयु के इंसान के जीवन मे धन संपदा और शौहरत का महत्व उतना नही रह जाता जितना कि जवानी में हुआ करता था

अब जिन बुजुर्गो की आयु 60 वर्ष + हो चुकी है उन्हें हमारे मतानुसार आप सबसे समय /सेवा और सहयोग की अपेक्षा सदैव रहती है कारण इस आयु के बुजर्ग के पास जबतक परिवार एवं मित्र नही होंगे तब वो स्वयं को अकेला /तन्हा महसूस तो करेगा ही साथ ही अपने जीवन के  अनुभवों से होने वाले लाभ /हानि किसी से नही बता पाएगा और ऐसी अवस्था मे उनके अनुभवी रूपी कमाई से आप वंचित रह जाएंगे
इसलिये हमारी माने तो अपने परिवार /समाज के बुजुर्गों को समय दीजिये उनसे अपने सुख /दुख बताये ताकि वो आपको सही राह दिखा सके और आप जीवन रहते उनके जैसी गलतियां /भूल नही करे

एक बात कुछ वर्षों से इंसान आपसी से प्रेम /सम्मान से अधिक महत्व धन संपदा को देने तो लगा है दिन रात की मेहनत के बाद हासिल भी कर लेंगे किन्तु क्या आप कमाई धन संपदा का सदुपयोग कर पाएंगे?

शायद नही कारण जवानी है तो धन संपदा नही और जवानी बीत गई तब धन संपदा का महत्व क्या ?

ये बड़े बड़े भवन /बैंको में लाखों करोड़ों बेलेंस किस काम का सोचिये ये काम का तभी तक है जबतक आप या आपका कोई अपना उसका उपयोग कर पाए अन्यथा ये भवन /बेलेंस तो यही रहेंगे किन्तु आप नही होंगे


भावार्थ - धन संपदा खूब कमाओ किन्तु अपने परिवार एवं बुजुर्गो को समय देना मत भूले क्योकि बुजुर्गो के सानिध्य में जो शकुन शांति मिलती है ना वो किसी भी भवन /धन से मिलना सम्भव नही

धन से आप किसी का समय /भवन/वस्तु खरीद तो सकते है किंतु मान सम्मान प्रेम सिर्फ और सिर्फ आपके त्याग /समर्पण और मेहनत से ही मिल सकता है ऐसा हमारा मानना है


आज के लिये इतना ही बाकी फिर कभी
    धन्यवाद

ॐ नमो ----//---

🌸🙏🏻🌸

रविवार, 1 दिसंबर 2019

क्या आप आजाद है ?

क्या आप
आजाद है

आदरणीय इसके लिये समझना होगा कि आजादी क्या है और कैद क्या ?

 जीवन मरण के बन्धनों से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति ही सच्ची आजादी है !

संसार मे स्वयं को आजाद दो ही तरह के मानते है एक अघोरी जो जिंदा रहते हुए अपना पिंड दान कर स्वयं को मृत (परमात्मा )मान लेता है दूसरे मृतदेह क्योकि जीवन मे रिश्ते नातो दैनिक जिम्मेदारी से आजाद होकर वो अंतिम यात्रा हेतु इंतजार करती है जो उसे विदा कर आये !

बेड़ियों में जकड़े हुए या जेल में बंद ही कैदी नही होते सही मायने संसार मे दो प्रकार   के कैदी होते है पहले कैदी वो है जो अपने कुविचारों /अनैतिक कर्मो में लिप्त (कैद) तो होते है किंतु उन्हें आभास नही होता अगर आभास होता भी है तो बहुत देर हो जाती है तब तक दूसरे वो कैदी है जो आत्मीय बन्धनों एवं जिम्मेदारीयो में जकड़े रहते है !

हमारे अनुसार आप /हम आज बेसक आजाद भारत के नागरिक है किंतु अभी भी ऐसा बहुत कुछ है जिससे आपको /हमे आजादी नही मिल रही !

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हमारे अनुसार जो व्यक्ति किसी भी कारण कुविचारों /अनैतिक कर्मो में लिप्त है वो उन्हें जितना जल्द त्याग से अच्छा रहेगा कारण  उस एक के कारण पूरा परिवार /रिश्तेदार एवं मित्रगण आये दिन अनावश्यक परेशान होते पाए गए है
उदाहरण : आज एक विवाहित युवक जो काफी समय से नशेड़ी है परिवार के लाख प्रयास के बाद भी सुधर नही रहा उसी के छोटे भाई की मौत भी नशे के कारन बीते महीने पूर्व ही हुई अब बुजुर्ग माँ / पिता कैसे करके घर चला रहे है किंतु वो कमाना तो दूर  अपने नशे की इच्छा हेतु माँ /पिता /बीबी आदि से मारपीट कर पैसे छीन ले जाता है आज उसे एक बार फिर नशामुक्ति वालो के हवाले किया घर मे उसकी पत्नी /माँ /बहने रोती रही पर उसकी सेहत पर तो जैसे कोई असर ही नही हो  इसलिये मेरा आप सबसे केवल इतना ही कहना है अपने कुविचार /अनैतिक कर्मो को त्याग कर परिवार और अपने लिये जीना शुरू करे परिवारिक प्रेम से बढ़कर कोई नशा नही हो सकता है !

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दूसरे कैदी वो है जो परिवारिक जिम्मेदारी एवं अपनी इच्छाओं की पूर्ति हेतु दिन रात धन कमाने में लगे तो रहते है पर सन्तुष्टि नही हो पाती उनकी कारण उन्हें लगता है जितना ज्यादा धन उनके पास होगा वो उतना ज्यादा सुख /खुशी हासिल कर पाएंगे किन्तु ऐसा नही है  क्योकि इंसान की इच्छाओं का कोई अंत नही संसार मे सुखी /खुश वो है जिसने सन्तुष्ट होना सीख लिया जरूरी नही आपके पास अन्य की भांति ज्यादा धन हो किन्तु अगर आपके परिवार में प्रेम /एकता आपसी सामंजस्य अगर है तो आप संसार के सबसे धनी /सुखी इंसान हो ऐसा हम मानते है !


भावार्थ : बुराई को त्याग कर सदमार्ग पर चले अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए परमधाम तक कि यात्रा की और अग्रसर हो !
   
            धन्यवाद!!

ॐ नमो---//---
🙏🏻🌹🙏🏻

ससुराल में बेटी कैसे बने?

ससुराल में बेटी कैसे बने?

नवविवाहिता की शिकायत ससुराल में बेटी नही मानते ?

आदरणीय इस पर आप सभी के अलग अलग विचार हो सकते है
किन्तु हमारे विचार से आप पूरा लेख पढ़ने के बाद ही अपनी शिकायत का समाधान जान सकती है -
     विवाह से पूर्व जब आप बेटी थी तब आपका क्या रोल था परिवार में आपका?
सुबह जब आप नींद से उठती या देर तक सोती रहती तब घर के काम चाय ,नाश्ता  और झाड़ू पौंछा आदि सब काम माँ या भाभी कर लेती थी !

दोपहर जब आप स्कूल /कॉलेज से आती तब तक रोटी /सब्जी /कपड़े धुलाई आदि सब माँ या भाभी कर लेती मतलब आप ने आकर भोजन के बाद आराम या पढाई ही कि होगी !

शाम का चाय /नाश्ता या सन्ध्या भोजन आदि के काम भी माँ /भाभी ही करती होगी यानी आप पूरा दिन पढाई /आराम और हंसी ठिगोली में ही लगी रही ये सब इसलिये क्योकि उस वक्त तक आपके कंधों पर परिवारिक जिम्मेदारी नही थी !

अब सोचिये अगर  आपकी माँ /भाभी भी आपकी तरह सोचती करती तब घर के काम कौन करता? अगर वो भी आपकी तरह ही रहने का प्रयास भी अगर करती तो क्या आपको इतना आराम /आजादी मिल पाती शायद नही ,
  विवाह से पूर्व लड़का हो या लड़की माँ /पिता की जिम्मेदारी होते है इसलिये वो आपकी आये दिन गलतियों को नजर अंदाज करते है या फिर कभी कभार हल्का डाँट फटकार कर बात खत्म करते है !

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विवाह के बाद आपके कंधों पर जिम्मेदारी आती है इसलिये अब आपको वो सब काम समय से करने होंगे जो आपके मायके में आपकी माँ या भाभी करती रही है आप अपनी जिम्मेदारियों से मुँह नही मोड़ सकती क्योंकि जिम्मेदारी से डरने/घबराने से लाभ कुछ नही बल्कि परिवारिक कलह ही आये दिन होने लगेगी !

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अब आप ये सोचिये की अगर आपकी माँ घर के काम रोटी /सब्जी /कपड़े धुलाई /झाड़ू पौंछा करती और आपकी भाभी देर तक आराम करती तब क्या आपको अच्छा लगता शायद नही !
या यूं कह लीजिये की आप देर तक सोए या जागे आपको कोई कुछ नही कहे और घर के काम आपकी सास या नन्द करे तब क्या उन्हें आपका देर तक सोना या जिम्मेदारी से मुंह मोड़ना अच्छा लगेगा शायद कभी नही !

इसलिये हमारा आपसे इतना ही कहना है कि आप परिवार के कामो को अपनी जिम्मेदारी मानकर निभाए  फिर देखिये आपके मायके की भांति आपकी ससुराल में भी आप सबकी चहेती /लाडली बेटी  बन जाएगी !

परमात्मा आप सबको सदैव खुश रखे स्वस्थ रखे आप सदैव अपनी जिम्मेदारियों को निभाती रहे !
        धन्यवाद !!

ॐ नमो---//---
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